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क्या यह जोड़ी 1.14 के स्तर तक गिर जाएगी, या फिर वापस 1.1610 – 1.1670 के दायरे में लौट आएगी, जिसमें यह पिछले सात हफ्तों से ट्रेड कर रही है? यही आने वाले सप्ताह का मुख्य सवाल है।
शुक्रवार को EUR/USD में कुछ ही घंटों में 100 पिप्स से अधिक की तेज गिरावट देखी गई, जो मजबूत अमेरिकी रोजगार आंकड़ों और बढ़ते जोखिम-से-परहेज (risk-off sentiment) के कारण हुई।
इसके अलावा, अमेरिका से आए अन्य मैक्रोइकोनॉमिक डेटा ने भी डॉलर को सपोर्ट दिया, खासकर ISM इंडेक्स, जिसने अमेरिकी अर्थव्यवस्था की मजबूती को दिखाया और मैन्युफैक्चरिंग तथा सर्विस सेक्टर में मंदी की चिंताओं को कम किया।
आने वाले सप्ताह में प्रमुख मैक्रोइकोनॉमिक (आर्थिक) डेटा रिलीज़ और घटनाएँ EUR/USD में महत्वपूर्ण उतार-चढ़ाव (volatility) पैदा कर सकती हैं। इस बार मुख्य फोकस अमेरिका की महंगाई (inflation) रिपोर्ट और जून में होने वाली European Central Bank की बैठक पर रहेगा।
बुधवार, 10 जून को अमेरिका मई महीने के Consumer Price Index (CPI) के आंकड़े जारी करेगा (FOMC बैठक से एक हफ्ता पहले)।
यह डेटा यह समझने में मदद करेगा कि हाल की महंगाई में तेजी कितनी टिकाऊ है और ऊर्जा कीमतों का असर कोर इन्फ्लेशन तक कितना पहुंच रहा है।
प्रारंभिक अनुमान के अनुसार:
तेल की कीमतों में वृद्धि से पेट्रोल और ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ी है, जो धीरे-धीरे अन्य वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में भी असर डाल रही है।
विश्लेषकों का अनुमान:
ऐसी स्थिति में डॉलर को फिर से मजबूती मिलेगी, क्योंकि Federal Reserve से सख्त नीति (hawkish stance) की उम्मीदें बढ़ जाएंगी।
लेकिन अगर Core CPI उम्मीद से कम आता है, तो बाजार कुल CPI वृद्धि को नजरअंदाज कर सकता है और उसे सिर्फ ऊर्जा प्रभाव मान सकता है।
गुरुवार को मई महीने का Producer Price Index (PPI) जारी होगा।
पिछले महीने:
इस बार भी PPI कई वर्षों के उच्च स्तर पर रह सकता है।
प्रमुख संकेत:
इससे संकेत मिलता है कि लागत और कीमतों पर दबाव बढ़ रहा है, और आने वाले महीनों में यह CPI को भी ऊपर धकेल सकता है।
प्रारंभिक अनुमान:
अगर कोर PPI में तेज बढ़ोतरी होती है, तो EUR/USD पर भारी दबाव आएगा क्योंकि यह भविष्य की महंगाई को मजबूत करता है।
लेकिन अगर Core PPI 5.2% से नीचे आता है, तो बाजार की प्रतिक्रिया सीमित रहेगी।
European Central Bank की बैठक भी इस सप्ताह बेहद अहम है।
अधिकांश अनुमान:
लेकिन यह कदम पहले से ही बाजार में "priced-in" है, क्योंकि पहले ही यूरोजोन महंगाई डेटा मजबूत आ चुका है:
इसलिए सिर्फ rate hike से यूरो को ज्यादा समर्थन मिलने की उम्मीद नहीं है।
अब असली सवाल यह है:
अगर ECB नरम संकेत (dovish tone) देता है, तो EUR/USD पर दबाव आएगा।
अगर और hikes के संकेत मिलते हैं, तो यूरो मजबूत हो सकता है।
कमजोर यूरोजोन GDP डेटा भी दबाव बढ़ा रहा है:
यह दिखाता है कि ECB के पास बहुत आक्रामक tightening का विकल्प सीमित है। तकनीकी दृष्टिकोण
EUR/USD:
कुल मिलाकर तकनीकी संकेत sell bias (short positions) दिखा रहे हैं।
यदि कीमत 1.1530 के नीचे बनी रहती है:
आने वाला सप्ताह EUR/USD के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
महंगाई (CPI, PPI) और ECB बैठक तय करेंगे कि डॉलर मजबूत रहेगा या यूरो में रिकवरी आएगी।