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अमेरिका के आर्थिक आंकड़ों में मजबूत आर्थिक विकास (Strong Growth) दिखाई देने के बावजूद महंगाई से जुड़ा कोई अप्रत्याशित नकारात्मक संकेत नहीं मिला। इसके बाद यूरो और ब्रिटिश पाउंड में तेजी देखने को मिली।
इसके पीछे का तर्क सीधा है: आमतौर पर मजबूत GDP आंकड़े डॉलर को मजबूती देते हैं, क्योंकि इससे फेडरल रिजर्व (Fed) द्वारा मौद्रिक नीति सख्त करने की संभावना बढ़ जाती है।
लेकिन इस बार आर्थिक विकास के मजबूत आंकड़ों के साथ महंगाई के आंकड़े भी बाजार की उम्मीदों के अनुरूप रहे। इसी वजह से डॉलर अपनी तेजी को आगे जारी रखने में सफल नहीं हो पाया।
आइए सबसे पहले आर्थिक विकास (Economic Growth) की बात करते हैं।
Q3 (तीसरी तिमाही) में अमेरिका की GDP में वार्षिक आधार पर 3.4% की वृद्धि हुई, जबकि Q2 में यह वृद्धि 2.2% थी। यह पिछले एक साल की सबसे तेज आर्थिक वृद्धि है और अर्थशास्त्रियों के औसत अनुमान से भी अधिक रही।
इस आर्थिक विस्तार में व्यावसायिक निवेश (Business Investment) की सबसे बड़ी भूमिका रही, जिसमें 12.7% की उछाल आई। यह 2020 के बाद सबसे बड़ी वृद्धि है।
मशीनरी और उपकरणों पर खर्च (Equipment Spending) ने भी आर्थिक विकास में योगदान दिया। महामारी के बाद आर्थिक रिकवरी को छोड़ दें, तो 2011 के बाद इस क्षेत्र में ऐसा विस्तार पहली बार देखने को मिला है।
इस पूंजीगत खर्च (Capital Expenditure या CapEx) का बड़ा हिस्सा AI इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ा है, हालांकि अब निवेश का दायरा बढ़कर अन्य क्षेत्रों तक भी पहुंच गया है।
घरेलू खर्च (Household Spending) ने भी अर्थव्यवस्था को सहारा दिया, लेकिन इसका योगदान पहले जितना मजबूत नहीं रहा।
लगातार दूसरी तिमाही में उपभोक्ता खर्च (Consumer Spending) में 3.8% की वृद्धि हुई। हालांकि, महंगाई के कारण लोगों की वास्तविक आय (Real Wages) की क्रय शक्ति कम हो रही है और उपभोक्ताओं का भरोसा भी कमजोर बना हुआ है।
इन्वेंट्री (Inventory) में वृद्धि ने GDP ग्रोथ में 1.6 प्रतिशत अंक का योगदान दिया।
वहीं, कुछ अन्य कारकों ने आर्थिक विकास पर नकारात्मक प्रभाव डाला:
फेडरल रिजर्व (Fed) द्वारा पसंद किया जाने वाला महंगाई का प्रमुख संकेतक PCE Price Index सितंबर में महीने-दर-महीने (Month-on-Month) 0.5% बढ़ा। मार्च के बाद यह सबसे तेज मासिक वृद्धि थी।
वहीं, कोर PCE (Core PCE), जिसमें खाद्य और ऊर्जा की कीमतें शामिल नहीं होतीं, महीने-दर-महीने 0.3% बढ़ा। यह बाजार की उम्मीदों के अनुरूप था। इससे पहले यह वृद्धि 0.2% थी।
दोनों आंकड़े बाजार के अनुमानों के मुताबिक रहे।
संक्षेप में कहें तो महंगाई का दबाव बढ़ा जरूर, लेकिन यह बाजार की उम्मीदों से अधिक नहीं था। इसलिए इन आंकड़ों ने फेडरल रिजर्व के लिए मौद्रिक नीति को और अधिक सख्त करने का कोई नया ठोस कारण नहीं दिया।
ध्यान दें कि साल-दर-साल (Year-on-Year) आधार पर कोर PCE अभी भी लगभग 3.6% के ऊंचे स्तर पर है, जबकि फेड का महंगाई लक्ष्य 2% है।
इसलिए बाजार अभी भी दिसंबर में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना को ध्यान में रख रहा है। हालांकि, नए आंकड़ों के बाद इस संभावना को और अधिक बढ़ाने का कोई कारण नहीं मिला।
सितंबर में वास्तविक उपभोक्ता खर्च (Real Consumer Spending) लगभग स्थिर रहा। इससे पिछले महीने इसमें तेज वृद्धि हुई थी।
इसका कारण यह था कि परिवारों ने कारों और महंगी वस्तुओं की खरीदारी पर अपना खर्च कम कर दिया।
वास्तविक डिस्पोजेबल आय (Real Disposable Income) अप्रैल के बाद पहली बार गिरी। वहीं, व्यक्तिगत बचत दर (Personal Saving Rate) घटकर 3.8% रह गई, जो 2022 के अंत के बाद सबसे निचला स्तर है।
यह डॉलर के लिए एक असुविधाजनक संकेत है, क्योंकि इससे पता चलता है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था का विकास सीमित वित्तीय बचत के सहारे आगे बढ़ रहा है।
केविन वार्श ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था की मजबूती और महंगाई को नियंत्रित करने की फेड की प्रतिबद्धता पर जोर दिया।
उन्होंने घरेलू खर्च की मजबूती, उत्पादकता में वृद्धि और व्यावसायिक निवेश के ऊंचे स्तर का हवाला दिया।
फेड ने अपनी बैठक में ब्याज दरों को अपरिवर्तित रखा। इसके बावजूद निवेशकों को अभी भी दिसंबर में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीद है।
यही वजह है कि यूरो और ब्रिटिश पाउंड अपनी कुछ पिछली गिरावट की भरपाई करने में सफल रहे।
डॉलर को अमेरिकी अर्थव्यवस्था की बुनियादी मजबूती की पुष्टि तो मिली, लेकिन उसे मौद्रिक नीति को और सख्त करने के लिए कोई नया आधार नहीं मिला। इसके अलावा, उपभोक्ताओं की कमजोर होती आय ने भविष्य की मांग की मजबूती को लेकर संदेह पैदा कर दिया।
यूरोपीय मुद्राएं अमेरिका से मिलने वाले किसी भी तटस्थ आर्थिक संकेत का फायदा उठाने की स्थिति में थीं।
यूरो और पाउंड के खरीदार डॉलर की तेजी रुकने का इंतजार कर रहे थे। डॉलर को आगे बढ़ने के लिए नया समर्थन नहीं मिला और आखिरकार इन दोनों मुद्राओं के पक्ष में दांव लगाने वाले निवेशकों को फायदा हुआ।
मेरा अनुमान है कि यदि अमेरिका के महंगाई संबंधी आंकड़े बाजार को कोई अप्रत्याशित झटका नहीं देते हैं, तो आने वाले दिनों में यूरो और पाउंड अपनी सीमित तेजी (Moderate Bounce) बनाए रख सकते हैं।
हालांकि, इस तेजी को लंबे समय तक जारी रखना मुश्किल होगा।
इसके दो प्रमुख कारण हैं:
फिलहाल खरीदारों (Buyers) के सामने सबसे पहला लक्ष्य 1.1195 के स्तर को दोबारा हासिल करना है।
यदि कीमत इस स्तर से ऊपर निकलती है, तो अगला लक्ष्य 1.1210 और उसके बाद 1.1230 होगा।
हालांकि, बड़े संस्थागत निवेशकों (Large Players) के समर्थन के बिना इन स्तरों के ऊपर टिकना मुश्किल हो सकता है।
गिरावट की स्थिति में:
पाउंड के खरीदारों को सबसे पहले 1.3405 के निकटतम रेजिस्टेंस (Resistance) स्तर को पार करना होगा। इसके बाद अगला लक्ष्य 1.3435 होगा।
यदि कीमत 1.3435 के स्तर को भी पार कर लेती है, तो 1.3465 तक पहुंचने का रास्ता खुल सकता है।
गिरावट की स्थिति में:
मुख्य बात: अमेरिका की GDP मजबूत है, लेकिन महंगाई के आंकड़े उम्मीदों के अनुरूप हैं। इसलिए डॉलर को नई तेजी का पर्याप्त आधार नहीं मिला। फिलहाल यूरो और पाउंड को राहत मिली है, लेकिन दिसंबर में संभावित Fed Rate Hike इनकी तेजी के लिए आगे भी चुनौती बना रह सकता है।