AI की तेजी ने यूरोप के पुराने हो रहे परमाणु ऊर्जा संयंत्रों में नई जान फूंक दी है।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) में आई तेजी ने यूरोप के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र को दूसरा मौका दिया है। JPMorgan के विश्लेषकों का कहना है कि टेक कंपनियां नए डेटा सेंटरों के लिए स्थिर और कम-कार्बन वाली बिजली की तलाश में तेजी से आगे बढ़ रही हैं। इस जरूरत को मौसम पर निर्भर पवन ऊर्जा संयंत्र विश्वसनीय रूप से पूरा नहीं कर सकते।
यूरोपीय आयोग का अनुमान है कि डेटा सर्वरों की बिजली की मांग 2030 तक बढ़कर लगभग 115 TWh हो जाएगी, जबकि वर्तमान में यह करीब 70 TWh है। JPMorgan को इससे भी बड़ी वृद्धि की उम्मीद है, जिसमें अतिरिक्त बिजली की मांग का लगभग आधा हिस्सा स्कैंडिनेविया और इबेरियन प्रायद्वीप में केंद्रित होगा।
टेक कंपनियां विश्वसनीय बिजली के लिए अधिक कीमत चुकाने को भी तैयार हैं। Google ने फिनलैंड की Fortum के साथ 22 साल का समझौता किया है, जिसके तहत वह बाजार कीमतों से 60% अधिक प्रीमियम पर परमाणु ऊर्जा खरीदेगा। इससे पहले अमेरिका में Microsoft, Meta और Amazon भी परमाणु ऊर्जा खरीदने के लिए समझौते कर चुके हैं।
डेटा सेंटरों के पास स्थापित किए जाने वाले छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) एक आदर्श समाधान हो सकते हैं, लेकिन इनके 2030 के दशक की शुरुआत से पहले यूरोपीय संघ में चालू होने की उम्मीद नहीं है।
फिलहाल, नीति-निर्माता अपनी रणनीति बदल रहे हैं और मौजूदा परमाणु ऊर्जा संयंत्रों की आयु बढ़ाने के लिए तेजी से कदम उठा रहे हैं। यूरोपीय आयोग का अनुमान है कि 2050 तक परमाणु रिएक्टरों के आधुनिकीकरण और नए रिएक्टरों के निर्माण के लिए यूरोप को लगभग €241 अरब की जरूरत होगी।
फ्रांस और उत्तरी यूरोप के वे देश, जिन्होंने अपने परमाणु ऊर्जा संयंत्रों और अतिरिक्त बिजली उत्पादन क्षमता को बनाए रखा है, क्षेत्र में उभर रही ऊर्जा की कमी से सबसे अधिक लाभ उठाने की स्थिति में हैं।