सऊदी अरब की प्रमुख तेल रिफाइनरी पर हूती हमले के बाद कच्चे तेल की कीमत बढ़कर 115.68 डॉलर पर पहुंची।
28 अक्टूबर को वैश्विक तेल की कीमतों में तेज उछाल आया। इसकी वजह मध्य पूर्व में संघर्ष के और अधिक फैलने तथा लंबे समय तक जारी रहने की आशंकाओं में फिर से वृद्धि होना था, जिससे बाजारों में अस्थिरता बढ़ गई।
CNBC की रिपोर्ट के अनुसार, कीमतों में तेजी का तत्काल कारण हूती विद्रोहियों का यह दावा था कि उन्होंने सऊदी अरब के सबसे बड़े तेल रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स और खाड़ी क्षेत्र की तेल प्रसंस्करण क्षमता के एक प्रमुख केंद्र रास तनूरा (Ras Tanura) पर बैलिस्टिक मिसाइल से हमला किया है।
इस खबर के बाद ब्रेंट क्रूड वायदा की कीमत में कुछ समय के लिए 1.58% की वृद्धि हुई और यह बढ़कर 115.68 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया।
वॉशिंगटन से मिल रहे मिले-जुले संकेतों ने भी कारोबारियों की चिंता बढ़ा दी है। टेक्सास में एक चुनावी रैली के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ कोई भी सैन्य टकराव अमेरिका की शर्तों पर समाप्त होगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी समझौते में ईरान की परमाणु हथियार विकसित करने की क्षमता पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाना अनिवार्य होगा और इस मुद्दे पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
हालांकि, राष्ट्रपति पहले यह संकेत भी दे चुके हैं कि वह लंबे समय तक सैन्य संघर्ष जारी रखने के बजाय कूटनीतिक समझौते पर विचार कर रहे हैं। इन विरोधाभासी संकेतों के कारण कमोडिटी बाजारों में अनिश्चितता बनी हुई है।
इजरायल के राजनीतिक घटनाक्रम ने भी स्थिति को और जटिल बना दिया है। शुरुआती चुनावी नतीजों से संकेत मिलता है कि वहां लंबे समय तक राजनीतिक गतिरोध बना रह सकता है। न तो बेंजामिन नेतन्याहू का गठबंधन और न ही उनके प्रमुख प्रतिद्वंद्वी गादी आइजेनकोट को स्पष्ट बहुमत मिलता दिखाई दे रहा है।
गठबंधन बनाने को लेकर कई महीनों तक चलने वाली राजनीतिक खींचतान की संभावना के कारण ईरान के प्रति इजरायल की भविष्य की नीति का अनुमान लगाना और मुश्किल हो गया है।
फारस की खाड़ी से तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंकाओं के बीच, भू-राजनीतिक जोखिम प्रीमियम (Geopolitical Risk Premium) तेल की कीमतों को ऊंचा बनाए रखने वाला एक प्रमुख कारक बना हुआ है।