AI बूम से ताइवान और दक्षिण कोरिया में पूंजी का प्रवाह बढ़ा, जबकि चीन पीछे रह गया। |
एआई (AI) में तेजी से आई उछाल से ताइवान और दक्षिण कोरिया को बड़ा आर्थिक लाभ, जबकि चीन पीछे
एशिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते कारोबार का सबसे अधिक फायदा ताइवान और दक्षिण कोरिया को मिल रहा है। बैंक ऑफ अमेरिका के अनुमानों के अनुसार, AI तकनीकों की वैश्विक मांग इन दोनों अर्थव्यवस्थाओं में व्यावसायिक गतिविधियों को तेजी से बढ़ा रही है और सरकारी बजट को भी मजबूती दे रही है। वहीं, चीन इस तेजी से मिलने वाले लाभ का केवल सीमित हिस्सा ही हासिल कर पा रहा है।
इस साल की शुरुआत से दक्षिण कोरिया के AI तकनीक निर्यात में सालाना आधार पर 57% की वृद्धि हुई है, जबकि ताइवान के निर्यात में लगभग 44% और चीन के निर्यात में 21% की बढ़ोतरी हुई है। हालांकि दक्षिण कोरिया की विकास दर सबसे तेज है, लेकिन व्यापक आर्थिक लाभ (Macroeconomic Benefits) ताइवान को सबसे अधिक मिल रहा है।
ताइवान की अर्थव्यवस्था का टेक्नोलॉजी सेक्टर पर काफी अधिक निर्भर होना इसकी मुख्य वजह है। यहां निर्यात से होने वाली कमाई सीधे घरेलू अर्थव्यवस्था में पहुंचती है। ताइवान और दक्षिण कोरिया दोनों ही निर्यातकों पर टैक्स लगाकर उनसे प्राप्त अतिरिक्त राजस्व को नए निवेश और घरेलू मांग को बढ़ावा देने में लगा रहे हैं।
चीन की स्थिति इससे काफी अलग है। हालांकि देश के टेक्नोलॉजी निर्यात में वृद्धि हो रही है, लेकिन घरेलू मांग कमजोर है और स्थानीय सरकारों को वित्तीय संसाधनों की कमी का सामना करना पड़ रहा है। इन कारणों से टेक्नोलॉजी निर्यात से होने वाला सकारात्मक आर्थिक लाभ पूरी अर्थव्यवस्था तक नहीं पहुंच पा रहा है।
इन अलग-अलग आर्थिक परिस्थितियों का असर अब केंद्रीय बैंकों की नीतियों पर भी दिखाई देने लगा है। ताइवान और दक्षिण कोरिया जैसी अर्थव्यवस्थाओं में निर्यात से बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा आ रही है, जिससे महंगाई का दबाव बढ़ रहा है। इसके चलते वहां के केंद्रीय बैंकों के पास ब्याज दरें बढ़ाने की गुंजाइश बन रही है।
इसके विपरीत, चीन का केंद्रीय बैंक घरेलू खर्च में सुस्ती से जूझ रहा है। घरेलू मांग को मजबूत करने के लिए चीन आगे भी मौद्रिक नीति में ढील देने और ब्याज दरों में कटौती करने की तैयारी कर रहा है।